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Dr Laxman Singh Rathore IMD : विलक्ष्ण प्रतिभा के धनी डा. लक्ष्मण सिंह राठौड़

 Dr Laxman Singh Rathore IMD : विलक्ष्ण प्रतिभा के धनी डा. लक्ष्मण सिंह राठौड़

हम अपने आस-पास, अपने स्कूल कालेज में अपने से आगे पीछे पढ़े लोगों पर नजर डालें तो ऐसे लोगों की बहुत बड़ी सूची बन जाती है जिन्होंने अपने कैरियर, व्यवसाय आदि में सफलता के शिखर चूमें है। पर जमीन से जुड़े बुलंदियों रूपी आकाश को छूने वालों की इस सूची में अपने समाज व पूर्व के साथियों से जुड़े लोगों को याद रखने वालों की संख्या पर नजर डालें तो हमें कुछ ही नाम दिखाई देंगे।


अक्सर सफलता की ऊँचाइयां छूने वाले ज्यादातर लोग सफल होने बाद अपनी उन जड़ों, संपर्कों व जमीन को छोड़ देते है जहाँ से वे आये है, कुछ ही लोग होते है जिन्होंने अपने जीवन में कितनी ही बड़ी उपलब्धि हासिल की हो। पर वे अपने बचपन के दोस्तों, अपने सहपाठियों, अपने आस-पास रहे लोगों, रिश्तेदारों व समाज के लोगों को कभी नहीं भूलते, यही नहीं इनसे मिलने पर भी वे अपनी सादगी के चलते सामने वाले को महसूस भी नहीं होने देते कि ये सफलता के इतने बड़े शिखर पर पहुँच चुकें है। साथ ही सामाजिक सरोकारों के प्रति अपने दायित्व को बिना किसी दिखावे व प्रचार के बखूबी निभाते है। 

आज ऐसे ही एक जमीन से जुड़े, ग्रामीण परिवेश में पले-बढ,े शिक्षित हुए सादगी व सरल स्वभाव की प्रतिमूर्ति, समाज के प्रति सहृदय संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी व सामाजिक सरोकारों के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करने वाले व्यक्तित्व का परिचय करने जा रहे है।     

जी हाँ ! हम बात कर रहे है विलक्ष्ण प्रतिभा के धनी डा. लक्ष्मण सिंह जी राठौड़ का जिन्होंने राजस्थान में सर्वाधिक पिछड़े क्षेत्र फलौदी के पास एक छोटे से गांव अपनी ननिहाल “टेपू” गांव में रहकर टेपू से सात किलोमीटर दूर नित्य पैदल चलकर शिक्षा की शुरुआत की और अपनी लगन, मेहनत व कर्तव्य निष्ठा के बल पर आज आप भारत के मौसम विभाग के महानिदेशक व विश्व मौसम संगठन के उपाध्यक्ष है।

डा.लक्ष्मण सिंह जी राठौड़ का जन्म 4 जुलाई 1954 को नागौर जिले के सुखवासी गाँव के ठाकुर श्री चौन सिंह जी की ठकुरानी हर कँवर सा के गर्भ से हुआ।

आपने अपनी प्राथमिक शिक्षा की शुरुआत फलौदी के पास अपने ननिहाल टेपू गांव से सात किलोमीटर दूर स्कूल से शुरू की। जिसके लिए आपको नित्य सात किलोमीटर पैदल स्कूल आना जाना पड़ता था। ग्रामीण परिवेश से शिक्षा की शुरुआत करने के बाद आपने अपनी माध्यमिक शिक्षा जोधपुर स्थित राजस्थान की प्रसिद्ध चौपासनी स्कूल से पूरी की। इसके बाद भूपाल नोबल कालेज उदयपुर से आपने प्रथम श्रेणी से कृषि स्नातक की शिक्षा लेने के बाद राजस्थान कृषि कालेज उदयपुर में शोध पूरा कर डाक्टरेट की उपाधि धारण की।

शिक्षा पूर्ण करने के बाद सन 1980० में आपने भारतीय मौसम विभाग में मौसम वैज्ञानिक के तौर पर अपना कार्य शुरू किया और 1989 में आप डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलोजी में साइंटिफिक प्रिंसिपल ऑफिसर बने। 1994 में आपको मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड टेक्नोलोजी विभाग डाइरेक्टर चुना गया जहाँ सन 2000 में आपको पद्दोनत करते हुए विभाग का सलाहकार नियुक्त किया गया।

सन 2006 में आप कमीशन ऑफ एग्रीकल्चर मेट्रोलोजी व संयुक्त राष्ट्र में वर्ल्ड मेट्रोलोजिकल ओर्ग्नैजेशन का वाईस प्रेसिडेंट चुना गए। तो सन 2007 में आपको इंडिया मेट्रोलोजिकल डिपार्टमेंट, मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस का एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ मेट्रोलोजिकल चुना गया। 2009 में आपको इंडियन मेट्रोलोजिकल सोशायटी का अध्यक्ष चुना गया तो सन 2011 में आपको एशोसियशन ऑफ एग्रोमेटोलोजिकल का अध्यक्ष चुना गया और सन 2012 में आपको भारतीय मौसम विभाग का महानिदेशक बनाया गया देश के मौसम विभाग के इस सबसे बड़े पद पर आप आज भी कार्यरत है। यह आपकी विलक्षण प्रतिभा व योग्यता का ही कमाल है कि हल ही मैं मोदी सरकार ने आपका दो वर्ष का कार्यकाल बढाया है।

इनके अलावा भी आपके जीवन में कई सरकारी व गैर सरकारी संगठनों के अध्यक्ष, सम्मानित सदस्य, सरकारी पत्र-पत्रिकाओं के संपादक की उपलब्धियों की एक लम्बी सूची है जो आपकी विलक्ष्ण प्रतिभा को प्रदर्शित करती है।

पूर्व में मौसम की गलत भविष्यवाणियों के चलते आलोचना का शिकार रहने वाला मौसम विभाग आज आपके विद्वतापूर्ण नेतृत्व में सटीक व सही मौसम भविष्यवाणियों के लिए जन जन से प्रसंशा पा रहा है आम जन ही क्यों देश के एक बड़े अखबार भास्कर ने तो मौसम विभाग की सही भविष्यवाणियों की प्रसंशा करते हुए एक लेख तक प्रकाशित किया है। आजकल मौसम की भविष्यवाणियाँ सही होने की चर्चाएँ अक्सर लोगों की जुबां पर होती है और जब पूर्व में गलत भविष्यवाणियों के लिए बदनाम विभाग की सटीक व सही भविष्यवाणियों से अचम्भित किसी व्यक्ति के मुंह से सुनते हैँ- “कि हमेशा झूंठी भविष्यवाणी करने वाला विभाग आजकल पता नहीं कैसे सही भविष्यवाणी करने लगा है?”

तो सुनकर मन में गर्व महसूस होता है  कि- ये सब उपलब्धियां एक विद्वान क्षत्रिय डा.लक्ष्मण सिंह जी के नेतृत्व में हो रही है।

भारत के मौसम विभाग के सबसे ऊँचे पद व विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर पहुँचने के बादजूद भी आपके मन में अपनी जड़ों से जुड़े रहने, समाज के लोगों से मिलने व समाज सेवा के लिए कार्य करने के लिए रूचि ज्यों की त्यों बनी रही।

आपसे अक्सर सामाजिक चिंतन बैठकों में मिलना हो जाता है। हमारे सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं से आप अपने आवास पर नियमित रूप से मिलते रहते है इन बैठकों में आप समान विचारधारा रखने वाले विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग व्यक्तिगत रूप से सामाजिक कार्य करने वाले लोगों को आपसी तालमेल कर मिलजुल कर सामाजिक कार्य करने हेतु प्रेरित करते रहते है। साथ ही अपनी तरफ से हर तरह का सक्रीय सहयोग भी करते है। मैं हम जब डा. साहब से मिले है हमने उनके मन में समाज के प्रति दर्द व गिरते सामाजिक मूल्यों के प्रति गहरी चिंता व पीड़ा साफ महसूस की है।

आपके आवास पर राजपुताना समाज की प्रवासी महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से गणगौर व अन्य उत्सवों के आयोजन देखकर आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है कि आप और आपका परिवार राजस्थानी व राजपूती संस्कृति व परम्पराओं से गहराई से जुड़ा है। 

देश की वर्तमान राजनैतिक परिस्थितयों से भी आपका मन उद्वेलित है पर चूँकि आप सरकारी सेवा में है अतरू वर्तमान राजनैतिक दलों व राजनीति पर कोई टिप्पणी नहीं करते।

सेवा निवृति के बाद आपका सामाजिक कार्यों खासकर राजस्थान में कृषि कार्यों को बढ़ावा देने व कृषकों को कृषि के पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तरीके अपनाकर ज्यादा से ज्यादा उपज लेने के लिए प्रेरित व प्रशिक्षित करने के कार्य में अपना पुरा समय व्यतीत करने का इरादा है। राजस्थान में कृषि कार्यों को बढ़ावा देने से एक तरफ किसानों की आय बढ़ेगी वहीं पानी की कमी के चलते राजस्थान की कृषि पैदावार की उपज भी बढ़ेगी।          


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