भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है ‘परमवीर चक्र’, विदेशी महिला ने किया था डिजायन

param-vir-chakraपरमवीर चक्र भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। परमवीर चक्र उन सैनिकों को दिया जाता है जो दुश्मन के सामने अद्वितीय शूरवीरता एवं त्याग का परिचय देते हैं। इस सम्मान की शुरुआत 26 जनवरी 1950 से की गई जब भारत गणराज्य घोषित हुआ। पुरस्कार की विशिष्टता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि चार बड़े युद्ध लड़े जाने के बाद भी आज तक केवल 21 सैनिकों को ही दिया गया है।

amar-jawanपरमवीर चक्र सम्मान की शुरुआत  | दरअसल स्वतंत्र भारत में पराक्रमी सैनिकों को युद्ध भूमि में दिखाये गये पराक्रम के लिए अनेक प्रतीक सम्मान पुरस्कारों का चलन शुरू हुआ। 1950 तक भारत अपना संविधान रचने में व्यस्त रहा इसके बाद 26 जनवरी 1950 को जो विधान लागू हुआ, उसे 1947 से प्रभावी माना गया। इसलिए जिससे 1947-48 में हुए भारत-पाक युद्ध के वीरों को, जिन्होंने जम्मू- कश्मीर के मोर्चों पर अपना शौर्य दिखाया, उन्हें भी पुरस्कारों से सम्मानित किया जा सके। इस क्रम में युद्धभूमि में सैनिकों द्वारा दिखाए गये पराक्रम के लिए 1950 में तीन पुरस्कारों का प्रावधान किया गया, जो श्रेष्ठता के क्रम से इस प्रकार हैं- परमवीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र वर्ष 1952 में अशोक चक्र का प्रावधान किया गया।

परमवीर चक्र का इतिहास | भारतीय सेना के किसी भी अंग के अधिकारी या कर्मचारी परमवीर चक्र पुरस्कार के पात्र होते हैं एवं इसे देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न के बाद सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार समझा जाता है। इससे पहले जब भारतीय सेना ब्रिटिश सेना के तहत कार्य करती थी तो सेना का सर्वोच्च सम्मान विक्टोरिया क्रॉस हुआ करता था। इसीलिए परमवीर चक्र को अमेरिका के ‘सम्मान पदक’ तथा ‘यूनाइटेड किंगडम’ के ‘विक्टोरिया क्रॉस’ के बराबर का दर्जा हासिल है।

इसके साथ ही लेफ्टीनेंट या उससे कमतर पदों के सैन्य कर्मचारियों या उनके आश्रितों को नकद राशि या पेंशन देने का भी प्रावधान है। हालांकि पेंशन की न्यून राशि जो सैन्य विधवाओं को उनके पुनर्विवाह या मरने से पहले तक दी जाती है अभी तक विवादास्पद रही है।

विदेशी मूल की महिला ने किया डिजायन | परमवीर चक्र का डिज़ाइन विदेशी मूल की एक महिला ने किया था और 1950 से अब तक इसके आरंभिक स्वरूप में किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। भारतीय सेना की ओर से मेजर जनरल हीरालाल अटल ने परमवीर चक्र डिजाइन करने की ज़िम्मेदारी सावित्री खालोनकर उर्फ सावित्री बाई को सौंपी जो मूल रूप से भारतीय नहीं थीं।

स्विट्जरलैंड में 20 जुलाई 1913 को जन्मी सावित्री बाई का मूल नाम ‘ईवावोन लिंडा मेडे डे मारोस’ था जिन्होंने अपने अभिवावक के विरोध के बावजूद 1932 में भारतीय सेना की सिख रेजीमेंट के तत्कालीन कैप्टन विक्रम खानोलकर से प्रेम विवाह के बाद हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया था।

amarइंद्र का वज्र दर्शाता परमवीर चक्र | मेजर जनरल अटल ने सावित्री बाई को परमवीर चक्र का डिजाइन तैयार करने की ज़िम्मेदारी सौंपी। मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) ‘इयान कारडोजो’ की पुस्तक परमवीर चक्र के मुताबिक सावित्री बाई ने भारतीय सेना के भरोसे पर खरा उतरते हुए सैन्य वीरता के सर्वोच्च पदक के डिजाइन के कल्पित रूप को साकार किया। पदक की संरचना के लिए उन्होंने महर्षि दधीचि से प्रेरणा ली जिन्होंने देवताओं का अमोघ अस्त्र बनाने को अपनी अस्थियां दान कर दी थीं जिससे ‘इंद्र के वज्र’ का निर्माण हुआ था। पदक की संरचना एवं इस पर अंकित आकृतियां भारतीय संस्कृति एवं दैविक वीरता को बखूबी दर्शाती हैं।

1947 से 2012 तक के परमवीर चक्र विजेता  

मेजर सोमनाथ शर्मा
लांस नायक करम सिंह
सेकेंड लेफ़्टीनेंट राम राघोबा राणे
नायक यदुनाथ सिंह
कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह
कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया
मेजर धनसिंह थापा
सूबेदार जोगिंदर सिंह
मेजर शैतान सिंह
कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हामिद
लेफ्टीनेंट कर्नल आर्देशिर तारापोर
लांस नायक अलबर्ट एक्का
फ्लाईंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों
लेफ्टीनेंट अरुण क्षेत्रपाल
मेजर होशियार सिंह
नायब सूबेदार बन्ना सिंह
मेजर रामास्वामी परमेश्वरन
लेफ्टीनेंट मनोज कुमार पांडे
ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव
राइफलमैन संजय कुमार
कैप्टन विक्रम बत्रा

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