रक्त संचार बढ़ा देती है मेजर रामास्वामी की असाधारण बहादुरी की कहानी

ramaswamyशौर्य गाथा में आज हम बात करेंगे मेजर रामास्वामी परमेश्वरन् की जिन्हें उनके अदम्य साहस के लिए सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

बात सन् 1987 की है जब नवंबर में भारत से कई सैन्य टुकड़ियों को भारत-श्रीलंका समझौते के तहत श्रीलंक में कानून व्यवस्था के निगरानी हेतु भेजा गया था। इस दौरान मेजर परमेश्वरन् और उनकी टुकड़ी को वहां के अतिवादियों ने चारों तरफ से घेर लिया था। मगर ठीक उसी समय असाधारण धैर्य और तीक्ष्ण बुद्धि के दम पर मेजर की टुकड़ी ने अतिवादियों को पीछे से घेर लिया।

इसके बाद वे एक विद्रोही से एक के मुकाबले एक की मुद्रा में भिड़ पड़े, मगर इसी दौरान उनके सीने पर कहीं से एक गोली लग गई। मगर वे इससे भी विचलित नहीं हुए और उनका ही राइफल छीन कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे उनकी अंतिम सांस तक लड़ते रहे और उनके साथी सैनिकों के लिए प्रेरणा बने रहे। मेजर रामास्वामी परमेश्वरन् के इस अदम्य साहस के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित  किया गया था।

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