1971 वार के हीरो थे फ्लाइंग अॉफिसर सेखो, दुश्मन देश भी था बहादुरी का कायल

niraal-jeet-singh1971 में भारत-पाक के बीच हुए वॉर के नायकों की जब भी बात की जाएगी तो उसमें फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों का नाम शीर्ष पर लिया जाएगा। सेखों ने वॉर के दौरान पाकिस्तानी वायुसेना के जेट विमानों को भारतीय सीमा से मार भगाया था।

युद्ध में देश की रक्षा करते हुए 14 दिसंबर को सेखों शहीद हो गए थे। उनकी वीरता को देखते हुए 26 जनवरी 1972 को राष्ट्रपति वीवी गिरी ने सेखों को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया था। परमवीर चक्र वीरता के लिए दिए जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है। निर्मलजीत सिंह सेखों इंडियन एयरफोर्स के एकमात्र परमवीर चक्र विजेता है।

सन् 1971 के ऑपरेशन के दौरान फ्लाइंग अफ़सर निर्मल जीत सिंह सेखो 18 नंबर के फ्लाइंग बुलेट्स स्क्वाड्रन के साथ श्रीनगर में ड्यूटी पर थे। वे उन दिनों Folland Gnat fighter से उड़ान भरा करते थे, और दुश्मनों के एयरक्राफ्ट्स और ठिकानों को तबाह किया करते थे। श्रीनगर एयरफील्ड पर दुश्मनों के सबसे मारक सबरे एयरक्राफ्टों ने हमला कर दिया था। सेखो ने ठीक उसी समय उड़ान भरी और दो सबरे एयरक्राफ्टों को ख़ुद में उलझा लिया। वे दुश्मनों के दो लड़ाकू विमानों को धराशायी करने में सफल रहे, मगर इन सभी के बीच उनका एयरक्राफ्ट भी तबाह हो गया और भारत मां ने अपना एक लाल खो दिया।

सेखों की वीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुश्मन देश भी उनकी प्रशंसा करने से अपने आप को रोक नहीं पाता है। हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान भी उनकी बहादुरी का कायल था। पाकिस्तान के एक शीर्ष अधिकारी ने अपनी किताब में सेखों की बहादुरी की चर्चा करते हुए उनके बलिदान को खूब सराहा था। वॉर के दौरान सेखों ने न सिर्फ दुश्मनों के 3 सेबर जेट विमानों को अपने हमले का निशाना बनाया बल्कि पाकिस्तानी वायुसेना को उलटे पैर भागने पर मजबूर भी कर दिया था। भारत सरकार ने उनकी वीरता और देश के लिए बलिदान को देखते हुए उन्हें सम्मानित किया।

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