वीर अब्दुल हमीद ने छुड़ा दिए थे पाकिस्तानी सैनिकों के छक्के

hameedउत्तर प्रदेश के गाजीपुर के उस वीर सपूत की कहानी आपकी रगों में खून का संचार बढ़ा देगी। उसका नाम अब्दुल हमीद था। अब्दुल हमीद के पिता उस्मान फारुखी सेना में सेना लांस नायक थे। बचपन से पिता से देशभक्ति से किस्से सुन अब्दुल हमीद ने भी सेना में जाने का दृढ़ निश्चय किया।

1965 की लड़ाई में आठ सितंबर की रात अब्दुल हमीद पंजाब के तरन तारन जिले के खेमकरण सेक्टर में तैनात थे। इसी राय पाकिस्तान ने लड़ाई में अपने अपराजेय माने जाने वाले ”अमेरिकन पैटन टैंकों” को उतार दिया। पाक ने इन टैंकों से खेमकरण सेक्टर असल उताड़ गांव पर हमला किया। उस वक्त भारत मां के वीर सपूत अब्दुल हमीद ने मोर्चा संभाला. इस सैनिक की वारता को देखकर पाकिस्तानी सेना के छक्के छूट गए।

इस जांबाज जवान के पास बुलंद हौसले के अलावा और कोई हथियार नहीं था। अब्दुल हमीद जब अपनी जान की परवाह की किए पाकिस्तानी टैंकों के समने खड़े हो गए थे उस समय उनके पास सिर्फ ”गन माउनटेड” जीप थी। पाकिस्तानी टैंको के सामने अब्दुल हमीद की जीप तलवार के सामने सुई की तरह थी, लेकिन इस सुई ने पाक की नाक में दम कर दिया।

hameed-abवीर अब्दुल हमीद ने पाक टैंकों का कमजोरी को भांप लिया था। हमीद ने इन्हीं कमजोर हिस्सों पर निशाना साधना शुरू किया और एक एक कर पाकिसतानी टैंको को नेस्तानाबूत करना शुरू कर दिया। अब्दुल हमीद की वीरता ने भारतीय सैनिकों के हौसले को पंख दे दिए। हमीद पाकिस्तान के नौ टैंको को मिट्टी में मिला दिया। भारतीय सेना को हौसले के पाक सैनिक ज्यादा देर ना टिक पाए और वे उल्टे पांव भाग खड़े हुए।

वीर हमीद यहां भी नहीं रुके वे पाक सैनिकों का पीछा करने लगे। इसी दौरान वीर अब्दुल हमीद की जीप पर एक बम का गोला गिरा। इसमें हमीद गंभीर  रूप से घायल हो गए. अगले दिन यानी नौ सितंबर को भारत मां का वीर सपूत शहीद हो गया। भारतीय सेना की ओर से उनके निधन की आधिकारिक घोषणा 10 सितंबर को की गई।

सरकार ने वीर अब्दुल हमीद की शहादत को सलाम करते हुए उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र और फिर सेना का सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से अलंकृत किया।

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